सरकार का बड़ा तोहफ़ा: ₹2500 भत्ता और पहली नौकरी पर ₹15,000!

भारत के लाखों युवाओं के लिए खुशखबरी! यदि आपने अभी-अभी पढ़ाई पूरी की है और नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, या एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में…

महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करें

भारत के लाखों युवाओं के लिए खुशखबरी! यदि आपने अभी-अभी पढ़ाई पूरी की है और नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, या एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में हैं, तो भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की नई परियोजनाएँ आपका जीवन बदल सकती हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में “प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना” (PM Viksit Bharat Rojgar Yojana) नामक एक युगांतरकारी योजना की घोषणा की है, जिसके तहत पहली बार निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) में नौकरी पाने वाले युवाओं को ₹15,000 तक का वित्तीय प्रोत्साहन (Incentive) मिलेगा। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी नौकरी में 6 महीने और 12 महीने पूरे होने के बाद। इसके अतिरिक्त, विभिन्न राज्य सरकारें “बेरोजगारी भत्ता योजना” (Berojgari Bhatta) चला रही हैं, जहाँ योग्य बेरोजगार स्नातकों को हर महीने ₹1,000 से ₹2,500 (यहाँ तक कि कुछ राज्यों में इससे भी अधिक) तक की भत्ता राशि दी जा रही है, ताकि वे नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी और इंटरव्यू के लिए खुद को तैयार कर सकें।

इस लेख में, हम इन दो प्रमुख वित्तीय सहायता योजनाओं केंद्र सरकार की नई रोजगार योजना और विभिन्न राज्यों की बेरोजगारी भत्ता योजनाओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे। हम चर्चा करेंगे कि कौन योग्य है, आवेदन कैसे करना है, कितने पैसे मिलेंगे, और इन योजनाओं के माध्यम से भारत के 3.5 करोड़ से अधिक युवा कैसे लाभान्वित होंगे। यह जानकारी पूरी तरह से सत्यापित (Verified) और नवीनतम सरकारी रिपोर्टों पर आधारित है, जो आपको एक पारदर्शी और विश्वसनीय तस्वीर देगी।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY): पहली नौकरी का बड़ा कदम

भारत को 2047 तक एक ‘विकसित भारत’ बनाने का जो लक्ष्य सरकार ने रखा है, उसका एक प्रमुख आधार देश की युवा शक्ति को रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) ने एक नई “रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन” (Employment Linked Incentive – ELI) योजना शुरू की है, जिसका नाम है प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) यह योजना 1 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गई है और इसका लाभ 31 जुलाई 2027 तक सृजित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगा।

यह योजना वास्तव में क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

PM-VBRY मूल रूप से एक प्रोत्साहन योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य नियोक्ताओं (Employers) को नए और पहली बार नौकरी में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से देश के संगठित क्षेत्र (Organised Sector) में रोजगार बढ़ेगा और जो युवा पहली बार नौकरी की दुनिया में कदम रख रहे हैं, उन्हें एक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग ₹99,446 करोड़ (लगभग ₹1 लाख करोड़) का एक विशाल बजट आवंटित किया है।

सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से अगले दो वर्षों में देश में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार पैदा करना है, जिसमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी वे होंगे जो पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) के तहत पंजीकृत हो रहे हैं।

किसे मिलेंगे ये ₹15,000? (पहली बार नौकरी करने वालों के लिए लाभ)

इस योजना का ‘भाग A’ विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए बनाया गया है जो पहली बार नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।

  • लाभ: कर्मचारियों को ₹15,000 तक, यानी एक महीने के EPF वेतन के बराबर, राशि दो किस्तों में मिलेगी।
  • योग्यता:
  1. कर्मचारी को पहली बार EPFO में पंजीकृत होना चाहिए। यानी, यह उनकी संगठित क्षेत्र की पहली नौकरी होनी चाहिए।

  2. कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक हो सकता है।
  • पैसे मिलने का समय:
  1. पहली किस्त: नौकरी में लगातार 6 महीने पूरे करने के बाद।

  2. दूसरी किस्त: नौकरी में 12 महीने पूरे करने और एक विशिष्ट ‘वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम’ (Financial Literacy Programme) को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद।

महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रोत्साहन राशि का एक हिस्सा कर्मचारियों में बचत की आदत डालने के लिए एक बचत साधन (Savings Instrument) या जमा खाते में एक निश्चित अवधि के लिए रखा जा सकता है, जिसे कर्मचारी बाद में निकाल सकेंगे।

नियोक्ता या कंपनियों के लिए क्या लाभ हैं?

इस योजना का ‘भाग B’ नियोक्ताओं को अतिरिक्त कर्मचारी भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु बनाया गया है। सरकार नई भर्तियों के लिए नियोक्ताओं को प्रति कर्मचारी प्रति माह ₹3,000 तक का प्रोत्साहन भत्ता देगी।

  • योग्यता: EPFO में पंजीकृत संस्थाओं को नए कर्मचारी नियुक्त करने होंगे।
  • 50 से कम कर्मचारी होने पर: न्यूनतम 2 अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करने होंगे।

  • 50 या अधिक कर्मचारी होने पर: न्यूनतम 5 अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करने होंगे।
  • भत्ते की अवधि: यह प्रोत्साहन भत्ता दो साल तक दिया जाएगा। हालाँकि, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को विशेष महत्व देते हुए, यह अवधि तीसरे और चौथे वर्ष तक बढ़ाई गई है।

  • पैसे देने की प्रक्रिया (DBT): कर्मचारियों (भाग A) को पैसा सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों (Direct Benefit Transfer – DBT) में भेजा जाएगा। नियोक्ताओं (भाग B) को भुगतान सीधे उनके पैन-लिंक्ड बैंक खातों में किया जाएगा।

इस योजना के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी के लिए, आप श्रम और रोजगार मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (PIB Release ID: 2148270) देख सकते हैं।

बेरोजगारी भत्ता योजना: नौकरी की तैयारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा

जहाँ PM-VBRY नई नौकरी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन देती है, वहीं ‘बेरोजगारी भत्ता योजना’ या अनएम्प्लॉयमेंट अलाउंस स्कीम्स उन शिक्षित बेरोजगार युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जो अभी भी उपयुक्त नौकरी की तलाश कर रहे हैं। यह भत्ता उन्हें सरकारी नौकरी की परीक्षाओं, इंटरव्यू की तैयारी या नए कौशल सीखने के दौरान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने में मदद करता है।

यह मुख्य रूप से एक राज्य-संचालित योजना है, इसलिए इसके नियम, भत्ते की राशि और योग्यता मानदंड हर राज्य में अलग-अलग हैं। लेकिन सामान्य अवधारणा यह है कि विशिष्ट शैक्षणिक योग्यता होने के बावजूद जो बेरोजगार हैं, उन्हें हर महीने ₹1,000 से ₹2,500 (या कुछ राज्यों में ₹4,500 तक) का भत्ता दिया जाता है, जो आमतौर पर अधिकतम दो साल के लिए होता है।

आइए, भारत के कुछ प्रमुख राज्यों की लोकप्रिय बेरोजगारी भत्ता योजनाओं के बारे में विस्तार से जानें।

बिहार: मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना (MNSSBY)

बिहार सरकार अपने “सात निश्चय” कार्यक्रम के हिस्से के रूप में इस योजना को चलाती है, जो राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा सहारा है।

  • वित्तीय लाभ: प्रति माह ₹1,000
  • अवधि: अधिकतम 2 वर्षों के लिए।
  • योग्यता:
  1. आवेदक को बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. आयु 20 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  3. न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता: सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण। (हाल ही में इसे स्नातक पास उम्मीदवारों के लिए भी विस्तारित किया गया है)।
  4. आवेदक को सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश करनी चाहिए और किसी अन्य उच्च शिक्षा (जैसे रेगुलर कोर्स) में नामांकित नहीं होना चाहिए।
  5. यदि आवेदक को कोई अन्य छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड या सरकारी सहायता (जैसे स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड) मिल रही है, तो वह इस लाभ के पात्र नहीं होंगे।
  • एक महत्वपूर्ण शर्त: यह भत्ता पाने के लिए, लाभार्थी को बिहार सरकार के “कुशल युवा प्रोग्राम” (Kushal Yuva Program) के तहत भाषा (हिंदी और अंग्रेजी), संचार कौशल और बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान पर एक अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।
  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक उम्मीदवार बिहार सरकार के 7 Nishchay Yuva Upamission पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

हरियाणा: सक्षम युवा योजना (Saksham Yuva Yojana)

हरियाणा सरकार की ‘सक्षम युवा योजना’ शायद भारत की सबसे व्यापक बेरोजगारी भत्ता योजनाओं में से एक है, क्योंकि यह न केवल भत्ता, बल्कि इसके साथ मानदेय (Honorarium) कार्य भी प्रदान करती है।

इस योजना के दो भाग हैं:

  1. बेरोजगारी भत्ता:
  • 12वीं (10+2) पास: प्रति माह ₹900। (कुछ स्रोतों के अनुसार ₹1200)
  • स्नातक (Graduate): प्रति माह ₹1,500 (कुछ स्रोतों के अनुसार ₹2000)
  • स्नातकोत्तर (Post-Graduate): प्रति माह ₹3,000। (कुछ स्रोतों के अनुसार ₹3500)
  1. मानदेय कार्य:
  • भत्ता पाने वालों को विभिन्न सरकारी विभागों या संगठनों में प्रति माह 100 घंटे काम करना होता है।
  • इस काम के बदले में, उन्हें प्रति माह अतिरिक्त ₹6,000 मानदेय मिलता है।
  • योग्यता:
  1. आवेदक को हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. आयु: स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए 21 से 35 वर्ष
  3. शैक्षणिक योग्यता: राज्य या यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से डिग्री।
  4. आवेदक का नाम स्थानीय रोजगार कार्यालय (Employment Exchange) में कम से कम 3 साल से पंजीकृत होना चाहिए।
  5. पारिवारिक वार्षिक आय सभी स्रोतों से ₹3 लाख से कम होनी चाहिए।
  • अवधि: यह सुविधा अधिकतम 3 वर्ष या 35 वर्ष की आयु तक उपलब्ध है।
  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक उम्मीदवार हरियाणा रोजगार विभाग के Saksham Yuva पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

राजस्थान: मुख्यमंत्री युवा संबल योजना (Mukhyamantri Yuva Sambal Yojana)

राजस्थान सरकार इस योजना के माध्यम से राज्य के बेरोजगार स्नातक युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

  • वित्तीय लाभ:
  • पुरुष आवेदक: प्रति माह ₹4,000
  • महिला, ट्रांसजेंडर और विशेष रूप से सक्षम (PWD) आवेदक: प्रति माह ₹4,500
  • अवधि: अधिकतम 2 वर्षों के लिए।
  • योग्यता:
  1. आवेदक को राजस्थान का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. शैक्षणिक योग्यता: स्नातक (Graduate) या समकक्ष डिग्री।
  3. आयु: सामान्य वर्ग के लिए 21 से 30 वर्ष और SC/ST/OBC/महिला/PWD वर्ग के लिए 21 से 35 वर्ष।
  4. पारिवारिक वार्षिक आय ₹2 लाख से कम होनी चाहिए।
  • एक महत्वपूर्ण शर्त: यह भत्ता पाने के लिए, लाभार्थी को प्रतिदिन 4 घंटे राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी।
  • आवेदन प्रक्रिया: उम्मीदवार राजस्थान सरकार के Department of Skill, Employment and Entrepreneurship पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

विभिन्न राज्यों की बेरोजगारी भत्ता योजनाओं की तुलनात्मक तालिका

नीचे विभिन्न राज्यों की बेरोजगारी भत्ता योजनाओं की संक्षिप्त तुलना दी गई है। (ध्यान दें: यह जानकारी समय-समय पर बदल सकती है, इसलिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट देखें।)

राज्य योजना का नाम मासिक भत्ते की राशि मुख्य योग्यता
बिहार मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना ₹1,000 20-25 वर्ष, 12वीं पास (स्नातक सहित), नौकरी की तलाश
हरियाणा सक्षम युवा योजना ₹900 – ₹3,500 (योग्यतानुसार) + ₹6,000 (100 घंटे काम के लिए) 21-35 वर्ष, स्नातक/स्नातकोत्तर, 3 साल का रोजगार पंजीकरण
राजस्थान मुख्यमंत्री युवा संबल योजना ₹4,000 (पुरुष), ₹4,500 (महिला/विशेष योग्यजन) 21-30/35 वर्ष, स्नातक, अनिवार्य इंटर्नशिप
उत्तर प्रदेश बेरोजगारी भत्ता योजना ₹1,000 – ₹1,500 (परिवर्तनशील) 21-35 वर्ष, 12वीं/स्नातक, रोजगार कार्यालय में पंजीकृत
मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना लगभग ₹4,000 – ₹5,000 (यह भत्ते से अधिक इंटर्नशिप स्टाइपेंड है) 21-29 वर्ष, 100 दिनों के काम/प्रशिक्षण के लिए स्टाइपेंड

प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता बनाम कौशल विकास: एक संपूर्ण तस्वीर

यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि सरकार की सहायता केवल सीधे पैसे देने तक सीमित नहीं है। बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रही है। एक ओर, PM-VBRY (नई नौकरी के लिए) और बेरोजगारी भत्ता (नौकरी की तलाश के दौरान) सीधे वित्तीय सहायता देते हैं, वहीं दूसरी ओर, कौशल विकास योजनाएँ युवाओं को नौकरी के लिए योग्य बनाती हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)

यह कोई भत्ता योजना नहीं है, बल्कि यह मुफ्त कौशल प्रशिक्षण योजना है। भारत सरकार के फ्लैगशिप Skill India Mission के तहत, PMKVY का लक्ष्य लाखों युवाओं को उद्योग-संबंधित (Industry-relevant) प्रशिक्षण देना है।

  • PMKVY 4.0: इसका नया संस्करण इंडस्ट्री 4.0 पर केंद्रित है, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, कोडिंग, ड्रोन ऑपरेशन और 3D प्रिंटिंग।
  • लाभ: मुफ्त प्रशिक्षण, सरकारी प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट सहायता।
  • घटक: इसके दो मुख्य घटक हैं
  1. शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (STT): जो लोग स्कूल या कॉलेज ड्रॉपआउट या बेरोजगार हैं, उनके लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण।
  2. रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (RPL): जिनके पास पूर्व अनुभव है लेकिन कोई प्रमाणपत्र नहीं है, उनके कौशल को परखकर प्रमाणपत्र देना।

नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS)

यह “सीखें और कमाएं” (Earn while you learn) मॉडल है। यह बेरोजगारी भत्ता नहीं, बल्कि एक स्टाइपेंड-आधारित प्रशिक्षण है।

  • मॉडल: उम्मीदवार विभिन्न कंपनियों में ‘अप्रेंटिस’ या प्रशिक्षु के रूप में शामिल होते हैं। वे काम सीखने के साथ-साथ मासिक स्टाइपेंड भी पाते हैं।
  • स्टाइपेंड: कंपनी अप्रेंटिस को एक निश्चित स्टाइपेंड देती है (जैसे, ₹5,000 से ₹9,000 या अधिक)। सरकार उस स्टाइपेंड का 25% (अधिकतम ₹1,500 प्रति माह) कंपनी को वापस कर देती है, ताकि कंपनियाँ अधिक अप्रेंटिस रखने के लिए प्रोत्साहित हों।
  • आवेदन: इच्छुक उम्मीदवार www.apprenticeshipindia.gov.in पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

निष्कर्ष: एक समन्वित प्रयास

भारत में रोजगार का परिदृश्य जटिल है, और इसके समाधान के लिए कोई एक जादुई फॉर्मूला नहीं है। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि सरकार ने एक समन्वित और बहुआयामी रणनीति अपनाई है।

  • PM कौशल विकास योजना (PMKVY) और NAPS युवाओं को नौकरी के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने में मदद करके नींव तैयार कर रहे हैं।
  • विभिन्न राज्यों की बेरोजगारी भत्ता योजनाएँ उन शिक्षित युवाओं को एक आर्थिक सुरक्षा जाल (Safety Net) प्रदान कर रही हैं, जो सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहे हैं लेकिन अभी तक सफल नहीं हुए हैं।
  • और अंत में, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) उस सफलता के क्षण को यानी पहली नौकरी पाने को एक बड़े वित्तीय पुरस्कार के माध्यम से और भी मधुर बना रही है और साथ ही संस्थाओं को नई भर्ती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

ये सभी योजनाएँ एक-दूसरे की पूरक के रूप में काम कर रही हैं। यदि आप एक नौकरीपेशा हैं, तो अपने राज्य की बेरोजगारी भत्ता योजना के लिए आवेदन करना, स्किल इंडिया पोर्टल पर एक नया कोर्स करना, या अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर एक अवसर तलाशना ये सभी ‘विकसित भारत’ के नागरिक के रूप में आपकी आत्मनिर्भरता की यात्रा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

About Author

Leave a Comment