दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में संपन्न हुए G20 शिखर सम्मेलन के इतर एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में, भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने एक नए त्रिपक्षीय तकनीकी और नवाचार गठजोड़ Australia-Canada-India Technology and Innovation (ACITI) Partnership की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) द्वारा 23 नवंबर को घोषित यह साझेदारी न केवल कूटनीतिक संबंधों में आए हालिया तनावों के बाद एक ‘बर्फ पिघलने’ (thaw) का संकेत है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आपूर्ति श्रृंखला को चीन के वर्चस्व से मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम भी है।
प्रमुख बिंदु / Quick Take
- नया गठबंधन: ACITI (ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी) का औपचारिक शुभारंभ।
- फोकस क्षेत्र: क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, कोबाल्ट), ग्रीन हाइड्रोजन, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
- व्यापार लक्ष्य: भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
- भू-राजनीतिक महत्व: ‘फाइव आइज’ (Five Eyes) देशों के दो सदस्यों (कनाडा, ऑस्ट्रेलिया) का भारत के साथ तकनीक पर एक मंच पर आना।
- खनिज सुरक्षा: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ‘रेसिलिएंट सप्लाई चेन’ (Resilient Supply Chain) का निर्माण।
- अगला कदम: 2026 की पहली तिमाही में अधिकारियों की पहली उच्च-स्तरीय बैठक।
ACITI: एक नई तकनीकी कूटनीति का उदय
G20 जोहान्सबर्ग के हाशिये पर हुई इस बैठक ने वैश्विक तकनीकी कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। ACITI Partnership का मूल उद्देश्य तीन महाद्वीपों और तीन महासागरों में फैली इन लोकतांत्रिक शक्तियों की पूरक ताकतों (complementary strengths) को एकजुट करना है।
जहाँ भारत के पास विशाल डिजिटल बाजार, विनिर्माण क्षमता और मानव संसाधन है, वहीं ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के पास दुनिया के सबसे बड़े क्रिटिकल मिनरल्स के भंडार और उन्नत खनन तकनीकें हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, “यह पहल मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों को पूरक बनाएगी और नेट-ज़ीरो (Net Zero) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमारी साझा महत्वाकांक्षा को गहरा करेगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ और पश्चिमी जगत के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का एक नया मॉडल बन सकती है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं।
महत्वपूर्ण खनिज: चीन के एकाधिकार को चुनौती
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू Critical Minerals की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। वर्तमान में, कोबाल्ट, लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) के प्रसंस्करण (processing) में चीन का वैश्विक हिस्सा लगभग 90% है।
ताज़ा आँकड़े और संदर्भ:
ऊर्जा और संसाधन विभाग (ऑस्ट्रेलिया) और भारतीय खान मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के लिए इन खनिजों की मांग 2030 तक 4 से 6 गुना बढ़ने की उम्मीद है।
- लिथियम और कोबाल्ट: ACITI के तहत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा भारतीय कंपनियों (जैसे ‘काबिल’ – KABIL) को अपनी खदानों में निवेश और अन्वेषण के लिए प्राथमिकता देंगे।
- रॉयल्टी युक्तिकरण: भारत सरकार ने हाल ही में घरेलू खनन को बढ़ावा देने के लिए लिथियम और रेयर अर्थ खनिजों पर रॉयल्टी दरों को तर्कसंगत बनाया है, जिससे विदेशी निवेश के लिए माहौल तैयार हुआ है।
- संयुक्त अनुसंधान: CSIRO (ऑस्ट्रेलिया) और IITs (भारत) के बीच बैटरी रसायन विज्ञान और रिसाइकिलिंग तकनीक पर संयुक्त शोध को तेज़ किया जाएगा।
विशेषज्ञ की राय:
“यह केवल खनिजों को जमीन से निकालने के बारे में नहीं है, बल्कि उन्हें ‘प्रोसेस’ करने के बारे में है। अगर भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया मिलकर रिफाइनिंग क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो यह वैश्विक EV (इलेक्ट्रिक वाहन) बाजार के समीकरण बदल सकता है।” डॉ. सुष्मिता दास, वरिष्ठ फेलो, ऊर्जा सुरक्षा अध्ययन (पैराफ्रेज़्ड).
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भविष्य की तकनीक
गठजोड़ का तीसरा स्तंभ Artificial Intelligence (AI) है। जैसा कि Australia-Canada-India Technology and Innovation Partnership के मसौदे में उल्लेख किया गया है, तीनों देश “नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए एआई के बड़े पैमाने पर और नैतिक उपयोग” पर सहयोग करेंगे।
लाइव डेटा और निवेश:
- बुनियादी ढांचा: भारत में 2025 में AI बुनियादी ढांचे में भारी निवेश देखा गया है। उदाहरण के लिए, Google ने विशाखापत्तनम में भारत का पहला AI हब स्थापित करने के लिए 2026-2030 के बीच $15 बिलियन के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है
- ACITI की भूमिका: यह साझेदारी ओपन-सोर्स AI मॉडल, डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty), और सेमीकंडक्टर डिजाइन में साझा मानकों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कनाडा, जो AI अनुसंधान में एक वैश्विक नेता है (विशेष रूप से मॉन्ट्रियल हब), भारत के ‘IndiaAI Mission’ को तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
भारत-कनाडा संबंध: एक कूटनीतिक ‘Thaw’ (पिघलाव)
यह समझौता कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में आए खटास के बाद, यह पहली बड़ी सकारात्मक पहल है। 2025 के मध्य में कनाडा में हुए नेतृत्व परिवर्तन और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के पदभार संभालने के बाद से, दोनों देशों ने आर्थिक यथार्थवाद (economic pragmatism) की ओर कदम बढ़ाया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेता (मोदी और कार्नी) 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के लिए ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) पर बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। यह लक्ष्य वर्तमान व्यापार के आंकड़ों से दोगुने से भी अधिक है।
आधिकारिक बयान और प्रतिक्रियाएं
इस साझेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग (Penny Wong) ने कहा:
“हम एक तीखे और प्रतिस्पर्धी दौर में जी रहे हैं। हमारी रणनीतिक एकजुटता और आर्थिक संबंध अब पहले से कहीं अधिक गहरे हैं। ACITI उस भरोसे का प्रमाण है जो हम एक सुरक्षित इंडो-पैसिफिक के लिए साझा करते हैं।”
कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने भी अपनी हालिया भारत यात्रा (नवंबर 2025) के दौरान इस बात पर जोर दिया था कि “कनाडा भारत के ऊर्जा संक्रमण में एक विश्वसनीय भागीदार है,” विशेष रूप से यूरेनियम और पोटाश की आपूर्ति में।
डेटा प्रस्तुति: महत्वपूर्ण खनिज परिदृश्य (2025)
नीचे दी गई तालिका उन प्रमुख क्षेत्रों को दर्शाती है जहाँ यह त्रिपक्षीय सहयोग सबसे अधिक प्रभाव डालेगा:
| खनिज/संसाधन | वैश्विक शीर्ष उत्पादक | भारत की स्थिति (आयात निर्भरता) | ACITI का लक्ष्य |
| लिथियम | ऑस्ट्रेलिया (50%+), चिली | 100% आयात पर निर्भर | ऑस्ट्रेलिया से सीधी आपूर्ति और भारत में रिफाइनिंग। |
| कोबाल्ट | DRC, इंडोनेशिया | 100% आयात पर निर्भर | कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से नैतिक (ethical) सोर्सिंग। |
| रेयर अर्थ (REE) | चीन (प्रसंस्करण में 85%+) | 100% (प्रसंस्कृत) | आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण (Diversification)। |
| निवेश लक्ष्य | — | — | भारत-कनाडा व्यापार को $50 बिलियन (2030) तक पहुंचाना। |
आगे की राह: चुनौतियां और अवसर
हालांकि यह घोषणा उत्साहजनक है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां बरकरार हैं।
- क्रियान्वयन की गति: पूर्व में भी ऐसे कई समझौतों की घोषणा हुई है जो नौकरशाही लालफीताशाही में फंस गए। 2026 की पहली तिमाही में होने वाली अधिकारियों की बैठक यह तय करेगी कि यह साझेदारी कितनी व्यावहारिक है।
- चीन की प्रतिक्रिया: चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर हाल ही में लगाए गए प्रतिबंधों (Gallium/Germanium restrictions) के बीच, बीजिंग इस नए गठजोड़ को एक चुनौती के रूप में देख सकता है।
- व्यापार बाधाएं: भारत और कनाडा के बीच अभी भी CEPA पर हस्ताक्षर होना बाकी है, जो टैरिफ कम करने के लिए आवश्यक है।
निष्कर्ष
Australia-Canada-India Technology and Innovation (ACITI) Partnership केवल एक कागजी समझौता नहीं है; यह एक बदलती हुई विश्व व्यवस्था का प्रतीक है। ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी प्रभुत्व की दौड़ में, भारत ने अपने पुराने सहयोगियों के साथ नए समीकरण साधने की परिपक्वता दिखाई है। जहाँ एक ओर यह भारत के ‘आत्मनिर्भर’ लक्ष्यों को गति देगा, वहीं दूसरी ओर यह ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजार (भारत) में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका देगा।
जैसा कि जोहान्सबर्ग में नेताओं ने दोहराया, यह साझेदारी “भविष्य की सुरक्षा” के लिए है। अब सबकी निगाहें 2026 की शुरुआत पर टिकी होंगी, जब इस रूपरेखा को धरातल पर उतारा जाएगा।
