ढाका ‘लॉकडाउन’: सड़कों पर हिंसा, यूनुस सरकार अलर्ट पर

बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक बवंडर के केंद्र में है। 2024 के ऐतिहासिक जन-विद्रोह के लगभग 15 महीने बाद, देश की अपदस्थ और वर्तमान में प्रतिबंधित राजनीतिक ताकत, अवामी लीग,…

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बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक बवंडर के केंद्र में है। 2024 के ऐतिहासिक जन-विद्रोह के लगभग 15 महीने बाद, देश की अपदस्थ और वर्तमान में प्रतिबंधित राजनीतिक ताकत, अवामी लीग, ने आज सड़कों पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। यह गहराता Bangladesh political crisis (बांग्लादेश राजनीतिक संकट) पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

अवामी लीग द्वारा बुलाए गए ‘राष्ट्रव्यापी तालाबंदी’ (जिसे एक प्रभावी ‘बंद’ के रूप में देखा जा रहा है) के कारण गुरुवार को राजधानी ढाका सहित देश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यह बंद सुबह से शाम तक लागू रहा। पार्टी ने यह कदम अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) की उस कार्यवाही के विरोध में उठाया है, जिसमें शेख हसीना पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान सैकड़ों मौतों से संबंधित ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के आरोप तय किए गए हैं।

नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, न्यायाधिकरण 17 नवंबर को शेख हसीना की अनुपस्थिति में ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुनाने वाला है। आज के बंद के आह्वान को इसी फैसले के खिलाफ एक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

अंतरिम सरकार ने इस बंद को सख्ती से लिया है। पूरे देश में, विशेषकर ढाका में, प्रमुख सड़कों पर चेकपोस्ट बनाए गए हैं और वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों को गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया है, जिससे शहरों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जो छिटपुट हिंसा की घटनाओं से टूट रही है।

आज बांग्लादेश में क्या हुआ?

सुबह से ही अवामी लीग के समर्थक, जो अब भूमिगत होकर काम कर रहे हैं, ढाका और गाजीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों पर उतर आए।

  • हिंसा और आगजनी: बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट ‘खास खबर’ (Khas Khabar) की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर में ‘लॉकडाउन’ के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पें हुईं। कई स्थानों पर टायरों को जलाकर रास्ते बंद करने की कोशिश की गई और आगजनी की घटनाएं भी दर्ज की गईं। 
  • गिरफ्तारियां और सुरक्षा: अंतरिम सरकार ने किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए पिछले 24 घंटों में अवामी लीग के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। हवाई अड्डों और प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा सेना और विशेष पुलिस बलों को सौंप दी गई है।
  • आर्थिक प्रभाव: इस बंद से देश की पहले से ही डांवाडोल अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ा है। परिवहन सेवाएं ठप होने से माल की आवाजाही रुकी हुई है, और अधिकांश दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

विरोध का केंद्र: शेख हसीना के खिलाफ ICT का मामला

आज के इस राष्ट्रव्यापी बंद की जड़ें पिछले साल के राजनीतिक भूचाल में हैं।

पृष्ठभूमि: 2024 का छात्र विद्रोह

जुलाई 2024 में, सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली के खिलाफ शुरू हुआ एक छात्र आंदोलन देखते ही देखते एक विशाल सरकार विरोधी विद्रोह में बदल गया। हफ्तों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए, के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया। 5 अगस्त 2024 को, शेख हसीना ने देश छोड़ दिया और भारत में शरण ली, जिससे उनके 15 साल से अधिक के शासन का अंत हो गया। 

अंतरिम सरकार और ICT का गठन

हसीना के जाने के बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार के रूप में नामित कर एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इस सरकार के प्रमुख कार्यों में से एक था – 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों की जांच कराना। इसी के तहत, अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) को शेख हसीना और उनके कई शीर्ष सहयोगियों के खिलाफ ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के लिए मुकदमा चलाने का काम सौंपा गया।

अवामी लीग का रुख

अवामी लीग, जिसे बाद में अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, इन सभी आरोपों को “राजनीतिक प्रतिशोध” और “पार्टी को खत्म करने की साजिश” करार देती रही है। पार्टी का दावा है कि यह मुकदमा एकतरफा है और इसका उद्देश्य अवामी लीग को भविष्य की राजनीति से बाहर करना है। आज का बंद इसी कानूनी कार्यवाही के खिलाफ एक सीधा शक्ति प्रदर्शन है।

‘बांग्लादेश को चुप कराने’ का अभियान?

उपयोगकर्ता द्वारा उठाए गए दूसरे बिंदु – ‘बांग्लादेश को चुप कराने का अभियान’ – वास्तव में, यह अवामी लीग द्वारा वर्तमान यूनुस सरकार पर लगाया गया एक गंभीर आरोप है।

अवामी लीग के आरोप

सितंबर 2025 में, अवामी लीग ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया था कि यूनुस सरकार “डर का माहौल” पैदा कर रही है, “जहां चुप्पी ही अस्तित्व है।” पार्टी ने दावा किया कि उसके हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया है और उन्हें जेलों में प्रताड़ित किया जा रहा है, जो लोकतंत्र को “अंधेरे में मुरझाने” जैसा है। यह वही विमर्श है जिसे अवामी लीग ‘बांग्लादेश को चुप कराने’ के अभियान के रूप में प्रचारित कर रही है।

यूनुस सरकार का पलटवार

दूसरी ओर, डॉ. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। सरकार का तर्क है कि वह केवल 2024 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय कर रही है।

दिलचस्प बात यह है कि अगस्त 2025 में, यूनुस सरकार ने भारत पर यह आरोप लगाकर एक राजनयिक विवाद खड़ा कर दिया था कि अवामी लीग के नेता कोलकाता और नई दिल्ली से “बांग्लादेश विरोधी गतिविधियां” चला रहे हैं। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इन दावों का कड़ाई से खंडन करते हुए उन्हें “गलत” बताया था और बांग्लादेश में जल्द से जल्द स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की अपनी अपेक्षा दोहराई थी।

डेटा और सांख्यिकी: एक नजर में संकट

  1. हसीना का पतन: 5 अगस्त 2024 – शेख हसीना, बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली प्रधानमंत्री, ने छात्र विद्रोह के बाद देश छोड़ा।
  2. कानूनी कार्यवाही: 17 नवंबर 2025 – ICT द्वारा शेख हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में फैसला सुनाने की तारीख मुकर्रर की गई है। 
  3. चुनाव का वादा: फरवरी 2026 – अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉ. मुहम्मद यूनुस ने देश में अगले संसदीय चुनाव कराने के लिए यह संभावित समयरेखा प्रस्तावित की है। 

प्रमुख नेताओं का रुख और भविष्य की राह

यह संकट दो प्रमुख ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूम रहा है:

  1. शेख हसीना की वापसी की शर्तें

भारत से, शेख हसीना ने हाल ही में अपनी वापसी के लिए स्पष्ट शर्तें रखी हैं। 12 नवंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उनका रुख स्पष्ट है:

“उन्होंने (हसीना ने) कहा कि यदि बांग्लादेश में सहभागितापूर्ण लोकतंत्र स्थापित होता है और अवामी लीग से प्रतिबंध हटाया जाता है, तो वह वापस आने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी जोर दिया कि अवामी लीग (जो देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक है) को शामिल किए बिना कोई भी चुनाव “वैध नहीं होगा”।

  1. डॉ. यूनुस का ‘सुधार’ एजेंडा

डॉ. यूनुस की सरकार, जिसे ‘सुधारवादी’ माना जाता है, केवल चुनाव कराने पर ही नहीं, बल्कि व्यवस्था बदलने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने हाल ही में संविधान में संशोधन के लिए एक जनमत संग्रह (referendum) कराने और बांग्लादेश की संसद को एकसदनीय (unicameral) से द्विसदनीय (bicameral) बनाने का प्रस्ताव रखा है। 

निष्कर्ष: आगे क्या?

बांग्लादेश आज एक दोराहे पर खड़ा है। आज का ‘लॉकडाउन’ यह साबित करता है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद अवामी लीग की सांगठनिक शक्ति समाप्त नहीं हुई है और वह अपने नेता के बचाव में देश को ठप करने की क्षमता रखती है।

आने वाले दिन महत्वपूर्ण हैं। 17 नवंबर को ICT का फैसला देश में या तो स्थिरता की दिशा में एक कदम होगा (यदि इसे न्याय के रूप में देखा जाता है) या फिर यह और अधिक अशांति को भड़काएगा (यदि इसे प्रतिशोध के रूप में देखा जाता है)।

डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार के सामने दोहरी चुनौती है: 2024 के घावों पर मरहम लगाना और 2026 के लिए एक विश्वसनीय चुनावी जमीन तैयार करना। लेकिन जैसा कि शेख हसीना ने स्पष्ट कर दिया है, अवामी लीग के प्रतिबंध को हटाए बिना ‘सहभागितापूर्ण लोकतंत्र’ का मार्ग लगभग असंभव लगता है। आज का बंद सिर्फ एक ट्रेलर हो सकता है कि अगर इस राजनीतिक पहेली को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो यह Bangladesh political crisis और भी गहरा सकता है।

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