बिहार: नीतीश ‘रिटर्न्स’, तेजस्वी ‘फेल’

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना (Vote Counting) के शुरुआती चार घंटों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ कर दी है। आज सुबह 8 बजे 243 विधानसभा सीटों के…

महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना (Vote Counting) के शुरुआती चार घंटों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ कर दी है। आज सुबह 8 बजे 243 विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती शुरू हुई और सुबह 11:20 बजे तक के रुझान एक निर्णायक और शायद अप्रत्याशित रूप से विशाल जनादेश की ओर इशारा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी एग्जिट पोल के अनुमानों को पार करते हुए 180 से अधिक सीटों पर भारी बढ़त बना ली है, जो 122 के जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है।

यह रुझान, यदि अंतिम परिणामों में तब्दील होते हैं, तो यह न केवल नीतीश कुमार की सत्ता में रिकॉर्ड पांचवीं बार वापसी सुनिश्चित करेगा, बल्कि जनवरी 2024 में महागठबंधन छोड़कर एनडीए में वापस जाने के उनके ‘महा-राजनीतिक’ दांव को भी सही साबित करेगा।

वहीं, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन (Mahagathbandhan) के लिए यह रुझान एक बड़ा झटका है। कई सर्वेक्षणों में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार से अधिक पसंद किए जाने के बावजूद , उनका गठबंधन 60 सीटों के आसपास सिमटता दिख रहा है। यह Bihar Elections 2025 के सबसे बड़े विरोधाभासों में से एक को उजागर करता है: मतदाताओं ने चेहरे के तौर पर भले ही तेजस्वी को पसंद किया हो, लेकिन वोट देते समय उन्होंने एनडीए के ‘डबल इंजन’ और ‘सुशासन’ के नारे पर अधिक भरोसा जताया है।

ताज़ा रुझान (सुबह 11:15 बजे तक): आंकड़ों की कहानी

सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों से शुरू हुई गिनती ने जैसे ही EVM का रुख किया, एनडीए के पक्ष में एक ‘सुनामी’ सी दिखने लगी। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट और प्रमुख समाचार चैनलों पर चल रहे लाइव आंकड़ों के अनुसार, स्थिति निम्नलिखित है:

गठबंधन की स्थिति (अनुमानित रुझान)

गठबंधन पार्टियां सीटों पर बढ़त (सुबह 11:15 बजे)
एनडीए (NDA) भाजपा + जदयू + लोजपा(रा) + हम 180 – 188
महागठबंधन (MGB) राजद + कांग्रेस + वाम दल 50 – 58
अन्य जन सुराज + निर्दलीय 2 – 5
कुल सीटें 243
बहुमत का आंकड़ा 122

एनडीए के भीतर की लड़ाई: क्या भाजपा बनेगी ‘बड़ा भाई’?

इन चुनावों का एक सबसे दिलचस्प पहलू एनडीए के भीतर की गतिशीलता रही है। 2020 के चुनावों में जदयू केवल 43 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि भाजपा ने 74 सीटें जीती थीं।

लेकिन इस बार, शुरुआती रुझानों में जदयू का प्रदर्शन अपेक्षा से कहीं बेहतर है। सुबह 11:15 बजे के ECI रुझानों के अनुसार:

  1. भारतीय जनता पार्टी (BJP): लगभग 81 सीटों पर आगे।
  2. जनता दल (यूनाइटेड) (JD(U)): लगभग 71 सीटों पर आगे।
  3. लोजपा (रामविलास) (LJP-RV): चिराग पासवान की पार्टी 15 सीटों पर आगे।

यह लगभग बराबरी का मुकाबला, 2020 की तुलना में जदयू के लिए एक बड़ी वापसी है। इसने नीतीश कुमार की स्थिति को गठबंधन के निर्विवाद नेता के रूप में फिर से मजबूत कर दिया है।

हाई-प्रोफाइल सीटों का हाल: कहीं खुशी, कहीं गम

मतगणना के रुझानों में कई बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर लगी है:

  • राघोपुर (Raghopur): महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव (RJD) अपनी पारंपरिक सीट पर कड़े मुकाबले में फंसे हैं। कुछ राउंड की गिनती में वे भाजपा के सतीश कुमार से पीछे चल रहे थे, हालांकि ताजा रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मामूली बढ़त (916 वोट) बना ली है।
  • तारापुर (Tarapur): भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के प्रमुख दावेदार सम्राट चौधरी (BJP) अपने राजद प्रतिद्वंद्वी से लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। 
  • अलीनगर (Alinagar): राजनीति में कदम रखने वालीं लोक गायिका मैथिली ठाकुर (BJP) ने अलीनगर सीट से 3000 से अधिक वोटों की मजबूत बढ़त बना ली है।
  • छपरा (Chapra): राजद के टिकट पर उतरे भोजपुरी गायक खेसारी लाल यादव (RJD) भाजपा की छोटी कुमारी से 974 वोटों से पीछे चल रहे हैं।
  • मोकामा (Mokama): बाहुबली नेता अनंत सिंह (JD(U)), जो हाल ही में जदयू में शामिल हुए थे, अपनी सीट पर RJD की वीणा देवी से 2000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। 

विश्लेषण: एनडीए की ‘सुनामी’ के पीछे के 3 प्रमुख कारण

यह निर्णायक बढ़त केवल एक संयोग नहीं है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारकों का स्पष्ट हाथ दिख रहा है।

1. एग्जिट पोल का सही साबित होना (और उससे भी बेहतर)

11 नवंबर को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान समाप्त होने के बाद, लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल ने एनडीए की स्पष्ट जीत की भविष्यवाणी की थी।

  • Matrize Exit Poll: एनडीए को 147-167 सीटें, जबकि महागठबंधन को 70-90 सीटें दीं।
  • People’s Pulse: एनडीए को 133-148 सीटें और महागठबंधन को 75-101 सीटें दीं। 

मौजूदा रुझान (180+) इन एग्जिट पोल्स के उच्चतम अनुमानों को भी पार कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि एनडीए के पक्ष में एक मूक (silent) लहर थी, जिसे पोल पूरी तरह से भांप नहीं पाए।

2. रिकॉर्ड महिला मतदान: ‘साइलेंट वोटर’ ने फिर किया कमाल

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार ने इस बार 67.14% का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया, जो पिछले कई चुनावों में सबसे अधिक है।

“इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी महिला मतदाताओं का रिकॉर्ड तोड़ मतदान रहा है। महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में वोट डाला,” एक चुनाव अधिकारी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया। 

नीतीश कुमार की ‘सुशासन’ की छवि, शराबबंदी नीति और केंद्र सरकार की मुफ्त राशन व आवास योजनाओं का लाभ पारंपरिक रूप से महिला मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को एनडीए का ‘साइलेंट वोटर’ माना जाता है। यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत स्पष्ट रूप से एनडीए के पक्ष में गया है।

3. प्रशांत किशोर का ‘जन सुराज’ बेअसर

चुनाव से पहले, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ (JSP) को एक संभावित ‘किंगमेकर’ के रूप में देखा जा रहा था।  हालांकि, एग्जिट पोल ने उन्हें 0-5 सीटें दी थीं।

मौजूदा रुझानों में, जन सुराज पार्टी केवल 1 से 2 सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। यह स्पष्ट है कि उनका अभियान मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा और वे किसी भी गठबंधन का खेल बिगाड़ने या बनाने की स्थिति में नहीं हैं।

विपक्ष का रुख: कांग्रेस ने उठाए ‘अनियमितता’ के सवाल

जैसे-जैसे एनडीए की बढ़त मजबूत होती गई, विपक्षी खेमे से प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। जहां एनडीए नेता इसे ‘विकास की जीत’ बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा:

“रुझान हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप हैं और हमें जो फीडबैक मिल रहा था, यह उसी के मुताबिक है। मुझे लगता है कि एनडीए भारी बहुमत से जीतेगा।” 

इसके विपरीत, बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम ने “गिनती की अखंडता” पर संदेह जताया। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा:

“गिनती प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों” का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि शुरुआती दौर के बाद कई केंद्रों पर प्रक्रिया “अचानक धीमी” हो गई। उन्होंने प्रशासन पर “वोट चुराने” का प्रयास करने का आरोप लगाया और कहा कि “काउंटिंग सेंटरों के आसपास ‘सर्वर वैन’ घूमने” की खबरें हैं।

आगे क्या?

जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, रुझान अंतिम परिणामों में तब्दील होंगे। यदि ये रुझान बरकरार रहते हैं, तो एनडीए प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

हालांकि, असली सवाल अब यह होगा कि सरकार का नेतृत्व कौन करेगा? क्या नीतीश कुमार, जिन्होंने जदयू को 43 से 70+ सीटों तक पहुंचाया है, मुख्यमंत्री बने रहेंगे? या क्या भाजपा, जो एक बार फिर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है (81 सीटों पर बढ़त), मुख्यमंत्री पद के लिए अपना दावा पेश करेगी?

फिलहाल, बिहार का जनादेश स्पष्ट है: मतदाताओं ने एक बार फिर नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ पर भरोसा जताया है, और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष को अगले पांच साल और इंतजार करने का संकेत दिया है।

About Author

Leave a Comment