दिल्ली ब्लास्ट: आतंकी डॉ. उमर का ‘पैनिक’ अटैक! फरीदाबाद मॉड्यूल और 2900 किलो विस्फोटक का पूरा सच

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास सोमवार शाम हुआ भयावह कार बम धमाका एक बड़ी, सोची-समझी आतंकी साजिश का हिस्सा था, जो हरियाणा के फरीदाबाद में पुलिस की छापेमारी…

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दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास सोमवार शाम हुआ भयावह कार बम धमाका एक बड़ी, सोची-समझी आतंकी साजिश का हिस्सा था, जो हरियाणा के फरीदाबाद में पुलिस की छापेमारी के बाद घबराहट में अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों ने इस फिदायीन हमले के मुख्य साजिशकर्ता और संदिग्ध हमलावर की पहचान पुलवामा निवासी Delhi blasts suspect Doctor Omar Mohammed (दिल्ली ब्लास्ट के संदिग्ध डॉक्टर उमर मोहम्मद) के रूप में की है। माना जा रहा है कि उमर की मौके पर ही मौत हो गई।

यह धमाका उस ‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल के भंडाफोड़ से सीधे तौर पर जुड़ा है, जहां से जांच एजेंसियों ने 2900 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

मुख्य तथ्य: एक नज़र में

  • क्या हुआ: 10 नवंबर 2025, शाम लगभग 6:50 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 1 के पास एक सफेद हुंडई i20 कार में भीषण विस्फोट।
  • नुकसान: 9 लोगों की मौत की पुष्टि (कुछ रिपोर्टों में 11), और 29 से अधिक घायल, जिनमें 5 की हालत गंभीर है। (स्रोत: एनडीटीवी, इंडिया टीवी)
  • मुख्य संदिग्ध: पुलवामा का डॉ. उमर मोहम्मद। माना जा रहा है कि वह खुद कार चला रहा था और यह एक फिदायीन (आत्मघाती) हमला था।
  • तत्काल कारण: फरीदाबाद में जैश-ए-मोहम्मद (JEM) से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, जिसमें कई डॉक्टर शामिल थे।
  • बड़ी बरामदगी: फरीदाबाद मॉड्यूल से 7 गिरफ्तारियां, 2,900 किलो विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट), एक AK-56 राइफल, पिस्तौल और टाइमर डिवाइस जब्त किए गए। (स्रोत: इंडिया टुडे)
  • कानूनी कार्रवाई: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने UAPA की धारा 16 (आतंकी कृत्य), 18 (साजिश) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है।

लाल किले पर आतंकी हमला: सोमवार शाम क्या हुआ?

सोमवार, 10 नवंबर 2025 की शाम दिल्ली की सड़कें सामान्य थीं, जब शाम लगभग 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक सफेद हुंडई i20 कार में विनाशकारी विस्फोट हुआ। यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और इलाके में दहशत फैल गई।

“देर शाम करीब 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास यातायात सिग्नल पर धीमी गति से गुजर रही कार में विस्फोट हो गया। कार के अंदर कुछ लोग सवार थे। अन्य वाहन भी प्रभावित हुए।”

— सतीश गोलचा, दिल्ली पुलिस आयुक्त (जैसा कि लाइव हिंदुस्तान ने रिपोर्ट किया)

हालांकि शुरुआती बयानों में कार में कई लोगों के होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में जांच सीसीटीवी फुटेज पर केंद्रित हो गई। आजतक और इंडिया टीवी द्वारा एक्सेस किए गए सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) में एक शख्स (माना जा रहा है कि डॉ. उमर) को अकेले कार चलाते हुए और पार्किंग में जाते हुए देखा गया। वह काले रंग का मास्क पहने हुए था।

जांच से पता चलता है कि कार में अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल (ANFO) आधारित IED का इस्तेमाल किया गया था। विस्फोट में कार के परखच्चे उड़ गए और संदिग्ध हमलावर डॉ. उमर का शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया, जिसकी आधिकारिक पहचान के लिए डीएनए नमूने लिए गए हैं।

जांच के केंद्र में: कौन है Dr. Omar Mohammed?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इस हमले के तार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा तक पहुंच गए।

  • पहचान: मुख्य संदिग्ध की पहचान डॉ. उमर मोहम्मद के रूप में हुई है, जो पुलवामा का रहने वाला है।
  • प्रोफेशन: जांच एजेंसियां फरीदाबाद के अल फलाह मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी से उसके संबंधों की जांच कर रही हैं, जहां से इस टेरर मॉड्यूल के अन्य सदस्य भी जुड़े पाए गए हैं। (स्रोत: एनडीटीवी)
  • भूमिका: उमर को न केवल इस धमाके का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है, बल्कि वह फरीदाबाद से संचालित हो रहे बड़े जैश-ए-मोहम्मद (JeM) मॉड्यूल का सरगना भी हो सकता है।

कार का खूनी सफर

जांच में विस्फोट में इस्तेमाल हुई i20 कार के स्वामित्व का पता लगाने पर भी अहम सुराग मिले। यह कार कई बार बेची गई थी। पुलिस ने कार के मूल मालिक सलमान (गुरुग्राम) से पूछताछ की, जिसने बताया कि उसने कार बेच दी थी। यह कार अंततः पुलवामा के तारिक अहमद मलिक तक पहुंची। (स्रोत: जागरण, एबीपी न्यूज)

नवीनतम अपडेट (11 नवंबर, सुबह 9:45): जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तारिक अहमद मलिक और डॉ. उमर के दो भाइयों को पुलवामा से हिरासत में लिया है। माना जा रहा है कि तारिक ने ही यह कार डॉ. उमर को सौंपी थी। (स्रोत: लाइव हिंदुस्तान)

‘पैनिक’ थ्योरी: फरीदाबाद मॉड्यूल का भंडाफोड़ और दिल्ली ब्लास्ट का कनेक्शन

यह धमाका कोई अकेली घटना नहीं है। जांचकर्ता इसे “घबराहट में की गई कार्रवाई” (Act of Panic) मान रहे हैं।

1. ‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

दिल्ली ब्लास्ट से ठीक 24 से 48 घंटे पहले, जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस ने एक संयुक्त अभियान में फरीदाबाद और सहारनपुर में छापेमारी की।

  • इस ऑपरेशन में एक “पढ़े-लिखे आतंकियों” (White-Collar Terror) के नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें डॉक्टर और पेशेवर शामिल थे।
  • गिरफ्तार किए गए प्रमुख लोगों में डॉ. मुजम्मिल शकील गनई (फरीदाबाद), डॉ. आदिल अहमद राथर (सहारनपुर से) और लखनऊ की एक महिला डॉक्टर डॉ. शाहीन शाहिद (हिरासत में) शामिल हैं। (स्रोत: इंडिया टुडे, आजतक)

2. 2900 किलो विस्फोटक की चौंकाने वाली बरामदगी

इस मॉड्यूल की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी निशानदेही पर फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार जब्त किए गए।

तालिका: फरीदाबाद मॉड्यूल से बरामदगी (10 नवंबर 2025)

वस्तु मात्रा/विवरण स्रोत
विस्फोटक सामग्री ~2,900 किलोग्राम (ज्यादातर अमोनियम नाइट्रेट) इंडिया टुडे, लाइव हिंदुस्तान
आग्नेयास्त्र 1 AK-56 राइफल, 1 चीनी स्टार पिस्टल इंडिया टुडे
अन्य 20 टाइमर डिवाइस, डेटोनेटर, कारतूस टाइम्स ऑफ इंडिया
वाहन डॉ. शाहीन की कार (जिसमें राइफल मिली) आजतक

(उपरोक्त डेटा 10 और 11 नवंबर, 2025 को विभिन्न समाचार एजेंसियों द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित है।)

3. घबराहट में किया गया फिदायीन हमला

जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि डॉ. उमर मोहम्मद इसी मॉड्यूल का सरगना था।

खुफिया सूत्रों के अनुसार (जैसा कि खबर फास्ट और आजतक ने रिपोर्ट किया है), डॉ. मुजम्मिल और डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद डॉ. उमर मोहम्मद को एहसास हो गया कि वह अगला निशाना है। वह फरीदाबाद से फरार हो गया था।

माना जा रहा है कि 2900 किलो विस्फोटक दिल्ली-एनसीआर में कई बड़े और सिलसिलेवार धमाकों के लिए जमा किया गया था। लेकिन अपने साथियों के पकड़े जाने के बाद, उमर ने पकड़े जाने के डर से, हड़बड़ी में अपनी कार को IED में बदला और दिल्ली की ओर रुख कर दिया, जहां उसने इस फिदायीन हमले को अंजाम दिया।

विशेषज्ञ विश्लेषण: आतंक का बदलता चेहरा

यह घटना भारत में आतंकवाद के एक खतरनाक चलन को उजागर करती है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ ‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ कह रहे हैं।

अतीत में जहां अशिक्षित या गुमराह युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल पाया जाता था, वहीं फरीदाबाद मॉड्यूल में डॉक्टरों जैसे उच्च शिक्षित पेशेवरों की संलिप्तता चिंताजनक है। ये पेशेवर अपनी सामाजिक स्थिति का फायदा उठाकर आसानी से छिप सकते हैं, रसद (logistics) जुटा सकते हैं और विस्फोटक बनाने के लिए रसायनों (जैसे अमोनियम नाइट्रेट) तक पहुंच बना सकते हैं।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या ये डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद के विदेशी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे।

आगे क्या? (What to Watch Next)

  • डीएनए पुष्टि: विस्फोट स्थल से मिले शव के नमूनों का डॉ. उमर के परिवार के डीएनए से मिलान किया जाएगा ताकि उसकी पहचान की अंतिम पुष्टि हो सके।
  • पूछताछ: डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल और डॉ. शाहीन से पूछताछ कर इस नेटवर्क की पूरी गहराई का पता लगाया जाएगा।
  • अलर्ट: दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट जारी है, क्योंकि मॉड्यूल के अन्य सदस्यों के छिपे होने की आशंका है।

यह स्पष्ट है कि दिल्ली का यह धमाका एक बड़े, अधिक विनाशकारी आतंकी हमले की साजिश का घबराया हुआ और जल्दबाजी भरा अंत था। फरीदाबाद में 2900 किलो विस्फोटकों की समय पर बरामदगी ने राष्ट्रीय राजधानी को एक बड़े संकट से बचा लिया, लेकिन लाल किले पर हुआ यह हमला ‘व्हाइट कॉलर’ आतंक के नए और गंभीर खतरे की घंटी भी बजा गया है।

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