‘शिक्षित आतंकी’ पर घमासान: दिल्ली ब्लास्ट में 12 की मौत, हिमंत सरमा ने छेड़ी नई बहस

सोमवार, 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार बम विस्फोट (Delhi Red Fort Blast) ने न केवल राष्ट्रीय राजधानी को दहला दिया है, बल्कि एक…

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सोमवार, 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार बम विस्फोट (Delhi Red Fort Blast) ने न केवल राष्ट्रीय राजधानी को दहला दिया है, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय बहस को भी जन्म दे दिया है। एक ओर जहाँ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है और एक ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसमें कई उच्च-शिक्षित डॉक्टर शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। सरमा ने टिप्पणी की कि “शिक्षित होना” आतंकवादियों को “और भी खतरनाक” बना देता है और “जो वंदे मातरम नहीं गा सकते वे भारतीय नहीं हो सकते।”

मुख्य तथ्य: एक नजर में

  • हमला: 10 नवंबर, 2025 (सोमवार) की शाम, लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक हुंडई i20 कार में भीषण विस्फोट।
  • हताहत: मरने वालों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जबकि 24 से अधिक लोग घायल हैं। 
  • जांच: NIA ने जांच अपने हाथ में ली। हरियाणा के फरीदाबाद से लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट सहित) जब्त।
  • आरोपी: एक ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कई डॉक्टर (पुलवामा, लखनऊ, सहारनपुर निवासी) शामिल हैं। 
  • मुख्य विवाद: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने डॉक्टरों की संलिप्तता पर कहा, “शिक्षित होने से ये लोग और ज्यादा बम बनाएंगे।”
  • राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने इसे खुफिया विफलता बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है।

दिल्ली ब्लास्ट: जांच का नवीनतम अपडेट

10 नवंबर की शाम लगभग 6:50 बजे, लाल किले के पास सुभाष मार्ग पर जब ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ियाँ रुकी हुई थीं, तभी एक हुंडई i20 कार में जबरदस्त विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की कई गाड़ियाँ और ई-रिक्शा उसकी चपेट में आ गए और आग लग गई।

शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या 8 थी, लेकिन गुरुवार (13 नवंबर) तक यह बढ़कर 12 हो गई। हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट (13 नवंबर) ने 11वें मृतक की पहचान कश्मीर निवासी 25 वर्षीय बिलाल खान के रूप में की, जबकि द इकोनॉमिक टाइम्स ने 13 नवंबर को कुल 12 मौतों की पुष्टि की।

‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश

इस हमले की जांच ने तब एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया जब इसका संबंध फरीदाबाद में कुछ दिन पहले पकड़े गए एक आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा। जांच अब दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल से NIA को सौंप दी गई है। 

जांच का केंद्रबिंदु एक ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी नेटवर्क है, जिसे कथित तौर पर शिक्षित पेशेवर, मुख्य रूप से डॉक्टर चला रहे थे।

  1. डॉ. उमर उन नबी (पुलवामा): जांच एजेंसियों का मानना है कि उमर ही वह i20 कार चला रहा था जिसमें विस्फोट हुआ। 13 नवंबर को पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की कि घटनास्थल से मिले डीएनए नमूनों का मिलान उमर के परिवार के सदस्यों से हो गया है, जिससे यह साबित होता है कि विस्फोट में उसकी मौत हो गई। वह फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ा था।

  2. डॉ. मुजम्मिल गनाई (पुलवामा): इसे मॉड्यूल का एक प्रमुख सरगना माना जा रहा है। फरीदाबाद में उसके ठिकाने से लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक और बम बनाने की सामग्री बरामद हुई। मुजम्मिल की डायरियों से पता चलता है कि वे दो साल से अधिक समय से हमलों की योजना बना रहे थे। जांच से यह भी पता चला कि उसने इस साल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर हमले के लिए लाल किले की रेकी की थी। 
  3. डॉ. अदील अहमद राथर (कुलगाम): यह भी अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ा था। सहारनपुर से गिरफ्तार किए गए अदील के श्रीनगर स्थित लॉकर से एक एके-47 राइफल बरामद हुई।

  4. डॉ. शाहीन सईद (लखनऊ): डॉ. मुजम्मिल की करीबी सहयोगी। उस पर मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद घबराकर एक असॉल्ट राइफल को कूड़ेदान में फेंकने का आरोप है। 

इस मॉड्यूल के तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े होने के सबूत मिले हैं। 

‘शिक्षित होना ज्यादा खतरनाक’: हिमंत सरमा का विवादास्पद बयान

दिल्ली ब्लास्ट में डॉक्टरों की संलिप्तता सामने आने के बाद, बुधवार (12 नवंबर) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए एक बयान दिया जिसने देशव्यापी बहस छेड़ दी है।

“हमें सिखाया गया था कि अगर लोग शिक्षित होंगे, तो कोई उग्रवाद नहीं रहेगा… (लेकिन) एजुकेटेड होने का ये मतलब नहीं कि वो अच्छा काम ही करेगा। एजुकेटेड होने से ये लोग और ज्यादा बम बनाएंगे।”

हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम 

सरमा यहीं नहीं रुके। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और ‘वंदे मातरम’ से जोड़ते हुए कहा:

“जो लोग वंदे मातरम नहीं गा सकते वो लोग कभी भारतीय नहीं हो सकते। अगर आप भारतीय नहीं हो सकते, तो आप भारत माता को कभी अपनी मां नहीं मान सकते।”

हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम 

इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों में से एक पहले ‘लव जिहाद’ की गतिविधियों में शामिल था, जहाँ वह कॉलेज के दिनों में हिंदू लड़कियों को फँसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराता था। 

इस बयान के साथ ही, सरमा ने यह भी खुलासा किया कि असम पुलिस ने दिल्ली विस्फोट पर सोशल मीडिया पर “जश्न मनाने वाले” या आपत्तिजनक इमोजी पोस्ट करने वाले 5 लोगों को गिरफ्तार किया है और 34 अन्य की पहचान की है। 

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विश्लेषण: दो ध्रुवों पर बंटी राय

हिमंत बिस्वा सरमा के बयान और ‘शिक्षित’ आतंकियों के पकड़े जाने पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ तेजी से ध्रुवीकृत हो गई हैं।

विपक्ष का सरकार पर हमला

कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को केंद्र सरकार की एक बड़ी खुफिया विफलता करार दिया है और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा है।

  • अजय राय (अध्यक्ष, यूपी कांग्रेस): उन्होंने अमित शाह के तत्काल इस्तीफे की मांग की। राय ने कहा, “इस घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा? अमित शाह इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर घर जाना चाहिए। यह सरकार की नाकामी है।” उन्होंने इस हमले की तुलना पुलवामा और पहलगाम की घटनाओं से की। 
  • प्रियांक खड़गे (मंत्री, कर्नाटक सरकार): उन्होंने अमित शाह को “आजाद भारत का सबसे अक्षम गृह मंत्री” करार दिया। खड़गे ने सवाल उठाया, “दिल्ली, मणिपुर, पुलवामा, पहलगाम – क्या हमारे पास जवाब हैं?” 

‘स्टीरियोटाइपिंग’ का डर और ‘बेगुनाही’ की दलीलें

इस जांच में कश्मीरी डॉक्टरों के नाम आने के बाद, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने समाज को एक चेतावनी भी दी।

  • उमर अब्दुल्ला (मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर): उन्होंने कहा, “हर कश्मीरी मुस्लिम आतंकवादी नहीं होता।” उन्होंने आशंका जताई कि इस घटना के बाद देश के अन्य हिस्सों में कश्मीर के लोगों के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है। 
  • आरोपियों का परिवार: दूसरी ओर, लखनऊ से गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद के पिता ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि उनकी बेटी निर्दोष है और उसे “फंसाया जा रहा है”। 
  • सहकर्मी: डॉ. अदील के सहारनपुर अस्पताल के सहकर्मियों ने भी उसकी गिरफ्तारी पर गहरा आश्चर्य और अविश्वास व्यक्त किया, उनका कहना था कि उन्हें कभी उस पर शक नहीं हुआ।

आगे क्या?

दिल्ली लाल किला विस्फोट ने भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष एक नई और भयावह चुनौती पेश की है: ‘व्हाइट-कॉलर टेररिज्म’। यह धारणा कि शिक्षा और व्यावसायिक सफलता कट्टरपंथ का मुकाबला करती है, इस मॉड्यूल के भंडाफोड़ से चकनाचूर हो गई है।

NIA के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क की पूरी गहराई तक पहुंचना, उनके हैंडलर्स का पता लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि देश के अन्य हिस्सों में ऐसे और कितने ‘स्लीपर सेल’ सक्रिय हो सकते हैं।

साथ ही, हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों ने एक संवेदनशील समय में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि जहाँ एक ओर शिक्षित पेशेवरों का आतंकवाद की ओर रुख एक गंभीर चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर, इस तरह के बयानों से एक पूरे समुदाय को हाशिए पर धकेलने और जांच को सांप्रदायिक रंग देने का खतरा है। यह विस्फोट अब केवल एक आतंकी घटना नहीं रह गया है; यह भारत की सामाजिक और राजनीतिक दिशा पर एक जनमत संग्रह बन गया है।

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