वोटर लिस्ट अलर्ट: 9 दिसंबर को आएगा ड्राफ्ट, तुरंत चेक करें अपना नाम

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 2026 के चुनावी चक्र और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर अपनी सबसे बड़ी कवायद तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और…

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 2026 के चुनावी चक्र और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर अपनी सबसे बड़ी कवायद तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत देश के 12 प्रमुख राज्यों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत 9 दिसंबर 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट (Draft Voter List) जारी किया जाएगा। यह तारीख उन करोड़ों नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं या जिनका नाम संदिग्ध सूची में है। ड्राफ्ट प्रकाशन के साथ ही दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने की खिड़की भी खुल जाएगी।

त्वरित नज़र: मुख्य बिंदु 

  • ड्राफ्ट प्रकाशन की तारीख: 9 दिसंबर 2025
  • आपत्तियां दर्ज करने की अवधि: 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक
  • फाइनल वोटर लिस्ट: 7 फरवरी 2026
  • किन राज्यों में असर: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, गोवा, आदि।
  • कुल मतदाता कवर: लगभग 51 करोड़ (SIR फेज-2 के तहत)।
  • हेल्पलाइन: 1950 (टोल-फ्री) और voters.eci.gov.in पोर्टल।

क्या है 9 दिसंबर का ‘ड्राफ्ट’ और इसका महत्व?

निर्वाचन आयोग की शब्दावली में इसे ‘प्रारूप प्रकाशन’ कहते हैं। आसान भाषा में, यह आयोग की तरफ से जनता के सामने रखा गया वह “कच्चा चिट्ठा” है, जिसमें यह बताया जाता है कि आज की तारीख में कौन वोटर है और कौन नहीं।

9 दिसंबर को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अपने-अपने मतदान केंद्रों पर यह लिस्ट चस्पा करेंगे। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इस बार सामान्य पुनरीक्षण (SSR) के बजाय विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) हो रहा है। इसका मतलब है कि आयोग केवल नए नाम नहीं जोड़ रहा, बल्कि पुरानी सूचियों में मौजूद “घोस्ट वोटर्स” (फर्जी या मृत मतदाता) और दोहरे नामों को सख्ती से हटा रहा है।

महत्वपूर्ण: यदि 9 दिसंबर की ड्राफ्ट लिस्ट में आपका नाम नहीं है या उसमें कोई गलती है, तो आपके पास सुधार के लिए 8 जनवरी 2026 तक का ही समय होगा। इसके बाद फाइनल लिस्ट में बदलाव करना मुश्किल हो जाएगा।

SIR फेज-2: 51 करोड़ मतदाताओं की अग्निपरीक्षा

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रक्रिया (SIR Phase-2) में देश के करीब 51 करोड़ मतदाता दायरे में हैं। 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक BLO घर-घर जाकर सत्यापन (Verification) कर रहे हैं।

राज्यों की स्थिति 

राज्य प्रक्रिया का स्तर प्रमुख चुनौती
उत्तर प्रदेश अंतिम चरण में सत्यापन विस्थापित और दोहरे मतदाताओं की पहचान।
पश्चिम बंगाल अत्यधिक संवेदनशील पुराने 2002-03 के रिकॉर्ड्स का मिलान; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप।
मध्य प्रदेश/राजस्थान डेटा एंट्री जारी नए 18+ मतदाताओं (1 जनवरी 2026 को अर्हता) का पंजीकरण।

आंकड़ों की जुबानी:

  1. 99.07% गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) अब तक एकत्र किए जा चुके हैं ।
  2. अकेले उत्तर प्रदेश में 21 लाख से अधिक संदिग्ध मतदाताओं का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जा रहा है।
  3. पश्चिम बंगाल में पुराने रिकॉर्ड्स (Legacy Data) से मिलान अनिवार्य किया गया है, जिस पर राजनीतिक घमासान जारी है।

आधिकारिक बयान और विशेषज्ञ राय

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस बार की प्रक्रिया “त्रुटि-मुक्त” (Error-free) मतदाता सूची बनाने पर केंद्रित है।

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

“हम तकनीकी और मानवीय दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 9 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट में जो कमियां दिखेंगी, उन्हें ठीक करने के लिए हमारे पास एक महीने का समय होगा। नागरिकों को इसे सरकारी काम मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार बचाने का सवाल है।”

विशेषज्ञ विश्लेषण:

वरिष्ठ चुनाव विश्लेषक डॉ. ए. के. वर्मा (Political Analyst) का मानना है:

“SIR जैसी गहन प्रक्रिया चुनावी जनसांख्यिकी (Demographics) को शुद्ध करती है, लेकिन इसमें हाशिए के लोगों (Migrant workers/Poor) का नाम कटने का जोखिम भी होता है। 9 दिसंबर की लिस्ट में अपना नाम चेक करना हर नागरिक की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, खासकर उन राज्यों में जहां 2026-27 में चुनाव होने हैं।”

आम आदमी पर असर: आपको क्या करना है?

9 दिसंबर को लिस्ट आते ही आपको तीन काम करने चाहिए:

  1. चेक करें: अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट या voters.eci.gov.in पर जाकर अपना नाम खोजें।
  2. वेरिफाई करें: नाम की स्पेलिंग, पिता/पति का नाम और पते की जांच करें।
  3. एक्शन लें:
  • नाम नहीं है? -> फॉर्म 6 भरें।
  • नाम कटवाना है (मृत/शिफ्टेड)? -> फॉर्म 7 भरें।
  • गड़बड़ी है? -> फॉर्म 8 भरें।

राजनीतिक सरगर्मी: ‘डिटेंशन सेंटर’ vs ‘शुद्धिकरण’

यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक नहीं रह गई है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसे लेकर तीखी बयानबाजी जारी है। जहां सत्ता पक्ष (BJP) इसे “घुसपैठियों को बाहर करने” का जरिया बता रहा है, वहीं विपक्ष (TMC/SP/Congress) इसे “वोटर लिस्ट से छेड़छाड़” करार दे रहा है।

पश्चिम बंगाल में विशेष रूप से, 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान के नियम ने खलबली मचा दी है। 9 दिसंबर का ड्राफ्ट जारी होते ही यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि तब यह साफ हो जाएगा कि कितने लोगों के नाम काटे गए हैं।

निष्कर्ष: अगले 45 दिन अहम

9 दिसंबर 2025 केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को मज़बूत करने का एक अवसर है। चाहे आप किसी भी राजनीतिक विचारधारा के हों, मतदाता सूची में आपका नाम ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। 8 जनवरी तक चलने वाले दावे और आपत्तियों के दौर में सक्रिय भागीदारी ही यह सुनिश्चित करेगी कि 7 फरवरी 2026 को आने वाली फाइनल लिस्ट वास्तव में भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है।

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