भारत-इज़राइल में नए समझौते, जल्द मिलेंगे मोदी-नेतन्याहू

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारत और इज़राइल (India-Israel) के रणनीतिक संबंधों में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। हालांकि सुरक्षा कारणों और शेड्यूल की…

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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारत और इज़राइल (India-Israel) के रणनीतिक संबंधों में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। हालांकि सुरक्षा कारणों और शेड्यूल की व्यस्तताओं के चलते इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। दोनों देशों के अधिकारी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम नेतन्याहू के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक के लिए एक नई तारीख तय करने पर काम कर रहे हैं। हाल ही में हुए उच्च-स्तरीय रक्षा समझौतों और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर शुरू हुई बातचीत ने यह साफ कर दिया है कि रणनीतिक साझेदारी “बिज़नेस एज़ यूज़ुअल” से कहीं आगे बढ़ चुकी है।

प्रमुख तथ्य 

  • नेतन्याहू की यात्रा: दिसंबर 2025 की प्रस्तावित यात्रा स्थगित; नई तारीखों पर काम जारी। इज़राइल ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास जताया है।
  • FTA पर मुहर: 20 नवंबर 2025 को दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए ‘Terms of Reference’ पर हस्ताक्षर किए। इसे दो चरणों में लागू करने की योजना है।
  • रक्षा सहयोग: 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में रक्षा तकनीक और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक नए MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
  • श्रम शक्ति: जुलाई 2025 तक, इज़राइल के निर्माण और देखभाल (caregiving) क्षेत्र में 20,000 से अधिक भारतीय श्रमिक कार्यरत हैं।
  • व्यापार के आंकड़े: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का इज़राइल को निर्यात $2.14 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्शाता है, लेकिन रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। 

यात्रा स्थगन और कूटनीतिक संकेत

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा, जो दिसंबर 2025 के लिए प्रस्तावित थी, फिलहाल टाल दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस स्थगन को 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट और सुरक्षा चिंताओं से जोड़ा जा रहा था। हालांकि, भारत सरकार और इज़राइली पीएमओ दोनों ने इन अटकलों को खारिज किया है।

इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंगलवार को एक स्पष्ट बयान जारी करते हुए कहा:

“इज़राइल और भारत के बीच का बंधन और प्रधानमंत्री नेतन्याहू व प्रधानमंत्री मोदी के बीच का रिश्ता बेहद मजबूत है। पीएम को पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा पर पूरा भरोसा है। टीमें नई तारीख तय करने के लिए समन्वय कर रही हैं।” 

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह स्थगन विशुद्ध रूप से शेड्यूलिंग और प्रोटोकॉल से जुड़ा है, न कि किसी सुरक्षा खतरे से। यह स्पष्ट करता है कि India-Israel Relations किसी भी तात्कालिक घटनाक्रम से प्रभावित नहीं होने वाले हैं।

व्यापार वार्ता: FTA की ओर बड़ा कदम

राजनीतिक अनिश्चितताओं से इतर, आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 20-22 नवंबर 2025 को इज़राइल का तीन दिवसीय दौरा किया, जहाँ उन्होंने अपने समकक्ष निर बरकत के साथ Free Trade Agreement (FTA) के लिए वार्ता की रूपरेखा (Terms of Reference) पर हस्ताक्षर किए।

दो चरणों वाला मॉडल :

मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते को दो चरणों में लागू करने पर विचार कर रहे हैं।

  1. प्रथम चरण: इसमें ‘लो-हेंगिंग फ्रूट्स’ यानी आसानी से सुलझने वाले मुद्दों और तत्काल लाभ वाले सेक्टर्स को शामिल किया जाएगा।
  2. द्वितीय चरण: इसमें अधिक जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी।

गोयल ने कहा, “हम चाहते हैं कि व्यापारिक समुदाय को जल्द से जल्द इसका लाभ मिले, इसलिए पहले चरण को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।” 

रक्षा सहयोग: ‘मेक इन इंडिया’ को बल

4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में संपन्न हुई 17वीं संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बारम ने एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं:

  • डिफेंस इंडस्ट्रियल को-ऑपरेशन। 
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में साझा अनुसंधान। 
  • ड्रोन तकनीक और मिसाइल रक्षा प्रणालियों का सह-विकास (Co-development)।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह MoU भारत के ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ (इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम) के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसमें इज़राइली तकनीक की भूमिका अहम हो सकती है।

भारतीय कामगार: इज़राइल की अर्थव्यवस्था की नई रीढ़

गज़ा संघर्ष के बाद इज़राइल में फिलिस्तीनी श्रमिकों की कमी को पूरा करने में भारत ने बड़ी भूमिका निभाई है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • जुलाई 2025 तक, 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक इज़राइल में कार्यरत हैं। 
  • इनमें से लगभग 6,700 श्रमिक द्विपक्षीय सरकारी फ्रेमवर्क (G2G) के तहत गए हैं, जबकि शेष निजी चैनलों (B2B) के माध्यम से।
  • अधिकतर भारतीय श्रमिक निर्माण (construction) और बुजुर्गों की देखभाल (caregiving) के क्षेत्र में तैनात हैं।

सुरक्षा चिंताओं के बावजूद, भारतीय श्रमिकों का वहां जाना दोनों देशों के बीच गहरे होते सामाजिक और आर्थिक विश्वास को दर्शाता है।

आगे की राह 

अगले कुछ महीनों में सभी की निगाहें दो मुख्य घटनाओं पर होंगी:

  1. नेतन्याहू की नई यात्रा तारीख: उम्मीद है कि 2026 की शुरुआत में यह यात्रा हो सकती है।
  2. FTA का पहला चरण: क्या भारत और इज़राइल अगले 6 महीनों के भीतर शुल्क कटौती (tariff reduction) की पहली सूची जारी कर पाएंगे?

निष्कर्षतः, तमाम क्षेत्रीय चुनौतियों और युद्ध की छाया के बावजूद, भारत और इज़राइल अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। पीएम मोदी और नेतन्याहू की आगामी मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक नए रणनीतिक रोडमैप का शंखनाद होगी।

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