पुतिन का ग्रैंड वेलकम: मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पर लगाया गले!

{India-Russia Summit 2025} के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विमान आज शाम दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। एक दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल…

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{India-Russia Summit 2025} के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विमान आज शाम दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। एक दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से परे जाकर अपने ‘पुराने मित्र’ का रेड कार्पेट पर आत्मीय स्वागत किया। यह यात्रा न केवल भारत-रूस संबंधों की गहराई को दर्शाती है, बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का भी प्रमाण है।

क्विक टेक: इस दौरे के 5 बड़े मायने

  • ऐतिहासिक आगमन: यूक्रेन युद्ध (2022) के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है।
  • निजी केमिस्ट्री: पीएम मोदी ने हवाई अड्डे पर पुतिन का स्वागत ‘गले लगाकर’ (Hug diplomacy) किया, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाता है।
  • व्यापार लक्ष्य: द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में $68.7 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है; अब $100 बिलियन का लक्ष्य रखा गया है।
  • रक्षा सौदे: S-400 मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और संभावित Su-57 फाइटर जेट डील एजेंडे में शीर्ष पर हैं।
  • डिनर डिप्लोमेसी: आज रात पीएम आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर दोनों नेताओं के बीच ‘प्राइवेट डिनर’ होगा।

रेड कार्पेट पर ‘दोस्ती’ का नया अध्याय

गुरुवार शाम करीब 7:00 बजे जब रूसी राष्ट्रपति का विशेष विमान ‘इल्यूशिन Il-96’ दिल्ली की सरजमीं पर उतरा, तो माहौल में कूटनीतिक गर्मी साफ महसूस की जा सकती थी। आमतौर पर विदेशी मेहमानों का स्वागत राज्य मंत्री करते हैं, लेकिन पीएम मोदी का खुद एयरपोर्ट जाना यह संदेश देता है कि मास्को के साथ रिश्ते नई दिल्ली के लिए कितने अहम हैं।

रेड कार्पेट पर दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और गले मिले। इसके बाद, दोनों नेता एक ही गाड़ी में बैठकर एयरपोर्ट से बाहर निकले, जो कूटनीतिक हलकों में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

कूटनीतिक ‘टाइटरोप’ और पश्चिमी दबाव

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देश, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ, भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, भारत ने अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, खासकर ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा।

विदेश मंत्रालय (MEA) के सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी दूतों ने ‘निजी तौर पर’ नई दिल्ली से आग्रह किया था कि पीएम मोदी पुतिन पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डालें। भारत का रुख स्पष्ट है “यह युद्ध का युग नहीं है,” लेकिन समाधान कूटनीति से ही निकलेगा, अलगाव से नहीं।

व्यापार और ऊर्जा: $100 बिलियन का रोडमैप

पुतिन के साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। एजेंडे में सबसे ऊपर ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार घाटे को संतुलित करना है।

मीट्रिक (Metric) आंकड़ा (Figure) विवरण
कुल द्विपक्षीय व्यापार $68.7 बिलियन वित्त वर्ष 2024-25 (रिकॉर्ड स्तर)
रूसी आयात $63.8 बिलियन मुख्य रूप से कच्चा तेल और उर्वरक
भारतीय निर्यात $4.9 बिलियन फार्मा, मशीनरी और कृषि उत्पाद
नया लक्ष्य (2030) $100 बिलियन दोनों देशों द्वारा निर्धारित

विशेषज्ञ राय: “रूस के लिए भारत अब केवल एक ‘हथियार खरीदार’ नहीं, बल्कि प्रतिबंधों से घिरी उसकी अर्थव्यवस्था के लिए एक जीवनरेखा (Lifeline) है। वहीं, भारत के लिए सस्ता रूसी तेल मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए अनिवार्य है।” सुहासिनी हैदर (डिप्लोमैटिक एडिटर, द हिंदू) से साभार।

रक्षा सहयोग: ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर

रक्षा क्षेत्र में, भारत अब केवल ‘खरीदार’ नहीं रहना चाहता, बल्कि ‘सह-उत्पादक’ (Co-producer) बनना चाहता है।

  • S-400: शेष स्क्वाड्रन की डिलीवरी में तेजी लाने पर बात होगी। 
  • लॉजिस्टिक्स पैक्ट: दोनों देशों के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौते (RELOS) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। 
  • Su-57: रूस अपने उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट के सह-उत्पादन की पेशकश कर सकता है। 

आधिकारिक बयान

विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को ‘विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ (Special and Privileged Strategic Partnership) को मजबूत करने वाला बताया है।

“राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा करने और 2030 तक आर्थिक सहयोग के लिए रणनीतिक दिशा तय करने का अवसर देगी।” रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय प्रवक्ता (MEA Press Release, 2025)।

आगे क्या होगा? 

  1. शुक्रवार (5 दिसंबर): हैदराबाद हाउस में शिखर सम्मेलन (Summit Talks)।
  2. समझौते: व्यापार, कनेक्टिविटी (चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर) और अंतरिक्ष सहयोग पर कई MoU साइन होंगे।
  3. संयुक्त बयान: क्या भारत यूक्रेन पर अपनी भाषा बदलेगा? इस पर सबकी नजर रहेगी।

निष्कर्ष

व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा साबित करता है कि भू-राजनीतिक तूफानों के बीच भी भारत-रूस की दोस्ती की जड़ें गहरी हैं। पीएम मोदी ने रेड कार्पेट पर स्वागत करके यह साफ कर दिया है कि नई दिल्ली अपने दोस्तों का चुनाव वाशिंगटन या ब्रुसेल्स के इशारों पर नहीं, बल्कि अपने हितों के आधार पर करती है।

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