सजीब वाजेद बोले: मेरी माँ की जान बचाने के लिए मोदी सरकार का आभारी!

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के बेटे और सलाहकार सजीब वाजेद जॉय ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि संकट के समय भारत सरकार ने…

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बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के बेटे और सलाहकार सजीब वाजेद जॉय ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि संकट के समय भारत सरकार ने उनकी माँ की जान बचाई। वह इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सदैव आभारी रहेंगे। वाजेद ने वर्जीनिया (यूएस) से समाचार एजेंसी एएनआई को हालिया इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में, वाजेद ने भारत के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। इसके अलावा, उन्होंने बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के तहत पनप रहे कथित आतंकवाद के खतरे को लेकर भारत को आगाह भी किया। उन्होंने बांग्लादेश न्यायाधिकरण द्वारा उनकी माँ को सुनाई गई मौत की सज़ा को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया। साथ ही, ढाका के प्रत्यर्पण अनुरोध को ‘अवैध और असंवैधानिक’ करार दिया।

त्वरित तथ्य / मुख्य जानकारी बॉक्स 

  • बयान का कारण: बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने 17 नवंबर, 2025 को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों’ के लिए मौत की सज़ा सुनाई। इसके बाद ढाका ने उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया।
  • भारत का आभार: सजीब वाजेद ने कहा, “भारत ने मेरी माँ की जान बचाई… क्योंकि अगर वह बांग्लादेश नहीं छोड़तीं, तो उग्रवादियों ने उनकी हत्या की योजना बना ली होती।” 
  • आतंकी खतरा: उन्होंने दावा किया कि अंतरिम यूनुस सरकार ने हजारों आतंकवादियों को रिहा कर दिया है। वास्तव में, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे समूह बांग्लादेश में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। उन्हें दिल्ली में हुए हालिया आतंकी हमलों से भी जोड़ा गया है। 
  • प्रत्यर्पण अनुरोध पर रुख: वाजेद ने बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध को ‘अवैध’ बताया। इसलिए, उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय अधिकारी इसे ‘खारिज’ कर देंगे, क्योंकि बांग्लादेश ने न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
  • वर्तमान स्थिति: शेख हसीना अगस्त 2024 में देश छोड़कर नई दिल्ली आ गई थीं। तदनुसार, वह तब से भारत में निर्वासन में हैं। भारत सरकार ने कहा है कि वह बांग्लादेश के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।

संकट का संदर्भ और सजीब वाजेद का बयान

बांग्लादेश की राजनीति में पिछले वर्ष जुलाई 2024 से उथल-पुथल है। छात्र-नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने 5 अगस्त, 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने और देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर दिया था। परिणामस्वरूप, नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार सत्ता में है।

न्यायाधिकरण का फैसला और प्रत्यर्पण अनुरोध

हाल ही में, 17 नवंबर, 2025 को, बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदोज्जमां खान को दोषी ठहराया। उन पर 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों’ का आरोप था। न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई। इस फैसले के बाद, अंतरिम सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया। चूंकि वह अगस्त 2024 से नई दिल्ली में निर्वासित हैं, इसलिए यह अनुरोध महत्वपूर्ण है।

भारत के प्रति आभार व्यक्त

इन्हीं घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए, हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने एएनआई के साथ बातचीत की। उन्होंने भारत की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से एक अच्छा दोस्त रहा है। इस संकट में, भारत ने वास्तव में मेरी माँ की जान बचाई है। दरअसल, अगर वह बांग्लादेश नहीं छोड़तीं, तो उग्रवादियों ने उनकी हत्या की योजना बना ली थी।” इस कथन के साथ, उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को धन्यवाद दिया। इस प्रकार, उनकी त्वरित कार्रवाई ने उनकी माँ को सुरक्षित निकलने में मदद की।

नवीनतम डेटा और खतरनाक रुझान

वाजेद ने अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में पनप रहे कथित चरमपंथ और आतंकवाद के बारे में चिंताजनक आँकड़े प्रस्तुत किए। निश्चित रूप से, ये भारत की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

1. रिहा किए गए ‘आतंकवादियों’ की संख्या

  • आँकड़ा: सजीब वाजेद ने दावा किया कि यूनुस सरकार ने शेख हसीना के कार्यकाल में दोषी ठहराए गए “दसियों हज़ार आतंकवादियों” को जेलों से रिहा कर दिया है। 
  • संदर्भ: ये वे लोग थे जिन्हें अवामी लीग सरकार ने उग्रवाद और चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए पकड़ा था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना कठिन है। फिर भी, यह भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

2. लश्कर-ए-तैयबा की कथित सक्रियता

  • आँकड़ा: वाजेद ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) अब बांग्लादेश में स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। 
  • जुड़ाव: उन्होंने आगे दावा किया कि बांग्लादेश में LeT की शाखा का संबंध दिल्ली में हुए हालिया आतंकी हमलों से भी मिला है। बेशक, उन्होंने इन हमलों की विशिष्ट जानकारी नहीं दी। लेकिन, यह भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

3. न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन

  • आँकड़ा: हसीना के मुकदमे की प्रक्रिया पर वाजेद ने सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उनके अभियोग से पहले ही अदालत से 17 जजों को बर्खास्त कर दिया गयाइसके अतिरिक्त, कानूनों में अवैध रूप से संशोधन किया गया ताकि त्वरित सुनवाई हो सके।
  • निष्कर्ष: उन्होंने तर्क दिया कि न्यायिक प्रक्रिया के घोर उल्लंघन के कारण ढाका का प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ और विशेषज्ञ विश्लेषण

अंतरिम सरकार पर सीधा हमला

सजीब वाजेद ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को “अनिर्वाचित, असंवैधानिक और अवैध” बताया। उनके अनुसार, यह एक ‘राजनीतिक तख्तापलट’ था। इसके अलावा, इसे जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामवादी पार्टियों ने समर्थन दिया है। परिणामस्वरूप, उन्होंने अपने ‘आतंकवादी’ तत्वों को रिहा कराया है। 

भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया

शेख हसीना पर आए फैसले के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक संतुलित और कूटनीतिक बयान जारी किया था।

  • MEA का वक्तव्य (17 नवंबर, 2025): “भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से संबंधित ‘बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’ द्वारा घोषित फैसले पर ध्यान दिया है। एक करीबी पड़ोसी के रूप में, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए शांति, लोकतंत्र, समावेश और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रकार, हम उस लक्ष्य के लिए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।”

यह बयान इस ओर इशारा करता है कि भारत सरकार वर्तमान में यूनुस सरकार को खुले तौर पर चुनौती नहीं दे रही है। फिर भी, वह ‘लोकतंत्र’ और ‘स्थिरता’ पर ज़ोर देकर न्यायिक प्रक्रिया के सवालों पर अपनी चिंता परोक्ष रूप से जाहिर कर रही है। सजीब वाजेद ने भी भारतीय लोकतंत्र और कानून के शासन में विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ‘अवैध’ प्रत्यर्पण अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

सुरक्षा पर विशेषज्ञ चिंताएं

भू-राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर अमर्त्य सेनगुप्ता का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता और चरमपंथी समूहों की कथित रिहाई भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उनका मानना है कि यूनुस सरकार अगर अति-दक्षिणपंथी इस्लामी तत्वों के प्रभाव में रहती है, तो यह भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी, घुसपैठ और उग्रवाद को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा, “शेख हसीना की सरकार ने पिछले 15 वर्षों में उग्रवाद के खिलाफ एक मजबूत रुख अपनाया था। हालांकि, अब, यह सब तेजी से बदल सकता है।” 

लोगों पर प्रभाव और आगे की राह

हसीना को मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। हसीना के राजनीतिक दल, अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

बढ़ती मानवीय लागत

  • मानवीय पहलू: अगस्त 2024 से पहले के तीन हफ्तों (15 जुलाई से 5 अगस्त) के विरोध प्रदर्शनों में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1,400 लोग मारे गए थे। इसके अतिरिक्त, देश के 340 बिलियन अमेरिकी डॉलर के परिधान उद्योग को भी भारी चोट पहुँची है। नतीजतन, लाखों श्रमिकों का जीवन प्रभावित हुआ है। 

आगामी चुनावों पर गतिरोध

  • चुनाव पर गतिरोध: सजीब वाजेद ने चेतावनी दी है कि अवामी लीग के समर्थक फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों को “किसी भी हाल में नहीं होने देंगे”लेकिन, यह तभी होगा जब पार्टी पर से प्रतिबंध नहीं हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन हिंसा का रूप ले सकते हैं। 

अगले कुछ हफ्तों में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से भारत और अमेरिका की प्रतिक्रियाएँ महत्वपूर्ण होंगी। बांग्लादेश में स्थिरता, विशेष रूप से फरवरी 2026 के चुनाव, इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरिम सरकार वाजेद के आरोपों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है। इसके अलावा, क्या वह न्यायिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कदम उठाती है।

निष्कर्ष: एक करीबी पड़ोसी का कूटनीतिक संतुलन

सजीब वाजेद का बयान भारत की कूटनीतिक चुनौतियों को उजागर करता है। एक ओर, भारत ने संकट के समय हसीना की जान बचाई। इस प्रकार, उसने एक करीबी सहयोगी के प्रति पड़ोसी धर्म निभाया। दूसरी ओर, उसे अब बांग्लादेश में पनप रहे उग्रवाद और अस्थिरता के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, वह एक अनिर्वाचित अंतरिम सरकार के साथ भी संबंधों को पूरी तरह बिगाड़ना नहीं चाहता। नई दिल्ली का अगला कदम, खासकर प्रत्यर्पण अनुरोध पर, भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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