पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 96 घंटों में भारी उथल-पुथल मची है। यह हलचल अब केवल अखबारों की सुर्खियों तक सीमित नहीं रह गई है। बल्कि, इससे 2026 के विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election 2026) की नई पटकथा लिखी जा रही है।
आज (मंगलवार, 18 नवंबर) शाम तक तीन बड़ी खबरें सामने आईं। पहली खबर दिल्ली हाईकोर्ट से जुड़ी है, जहां महुआ मोइत्रा की सुनवाई टल गई। दूसरी ओर, शत्रुघ्न सिन्हा की ‘बगावत’ पर टीएमसी ने चुप्पी साध रखी है। इसके अलावा, सुवेंदु अधिकारी ने ‘SIR’ (मतदाता सूची संशोधन) को लेकर बड़ा बयान दिया है। ये सभी घटनाएं इशारा कर रही हैं कि ममता बनर्जी के लिए ‘बुरा वक्त’ अब एक जमीनी हकीकत बनता जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पहली बार आत्मविश्वास डगमगाता दिख रहा है। यह वही पार्टी है जिसने 2021 में बड़ी जीत हासिल की थी। हालाँकि, बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत ने समीकरण बदल दिए हैं। नतीजतन, बीजेपी कार्यकर्ताओं में नया जोश है, जबकि टीएमसी कानूनी और आंतरिक कलह से जूझ रही है।
आज की बड़ी खबरें
- कोर्ट में महुआ: दिल्ली हाईकोर्ट ने आज महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह पहले लोकपाल के आदेश को देखेगा। लिहाजा, अगली सुनवाई अब 21 नवंबर को होगी। फिलहाल, खतरा टला नहीं है।
- सुवेंदु का दावा: विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने आज एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बिहार की जीत का राज ‘SIR’ (मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण) था। अब, बंगाल में भी यही प्रक्रिया ‘फर्जी वोटरों’ को बाहर करेगी।
- शत्रुघ्न पर सन्नाटा: शत्रुघ्न सिन्हा ने 48 घंटे पहले नीतीश कुमार (एनडीए) की तारीफ की थी। इसके बावजूद, टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं भेजा है। यह पार्टी की दुविधा को साफ दर्शाता है।
- ममता की रणनीति: सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने कल एक आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक उनके कालीघाट स्थित आवास पर होगी।
1. महुआ मोइत्रा: तिहाड़ या कृष्णानगर?
ममता बनर्जी की तेज-तर्रार सांसद महुआ मोइत्रा के लिए आज का दिन तनावपूर्ण रहा। गौरतलब है कि 12 नवंबर 2025 को लोकपाल ने उनके खिलाफ सीबीआई जांच को मंजूरी दी थी। सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने के लिए केवल 4 सप्ताह का समय मिला है।
आज दिल्ली हाईकोर्ट में महुआ के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि लोकपाल ने उन्हें सुने बिना आदेश दिया। परंतु, जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने आदेश पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया।
विशेषज्ञ की राय: “चार्जशीट दाखिल होने का सीधा मतलब है कि एजेंसी के पास सबूत हैं। यदि 21 नवंबर को स्टे नहीं मिलता, तो महुआ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सीबीआई उन्हें हिरासत में भी ले सकती है।”
संजय हेगड़े, वरिष्ठ अधिवक्ता (प्रतीकात्मक वक्तव्य)
आंकड़े बोलते हैं:
| तारीख | घटनाक्रम | स्थिति |
| 12 नवंबर 2025 | लोकपाल का आदेश | CBI को चार्जशीट की मंजूरी |
| 18 नवंबर 2025 | दिल्ली HC सुनवाई | 21 नवंबर तक टली, स्टे नहीं |
| दिसंबर 2025 | डेडलाइन | चार्जशीट दाखिल होना संभावित |
2. ‘बिहारी बाबू’ का यू-टर्न: क्या शत्रुघ्न भी पाला बदलेंगे?
बिहार चुनाव के नतीजों ने बंगाल में अजीब स्थिति पैदा कर दी है। टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने बिहार के सीएम और बीजेपी सहयोगी नीतीश कुमार के कसीदे पढ़े।
सिन्हा ने 15-16 नवंबर को ट्वीट करके नीतीश को “सभ्य और सफल” नेता बताया। दरअसल, राजनीति में समय का बहुत महत्व होता है। यह बयान ऐसे समय आया जब ममता बनर्जी ‘इंडिया’ गठबंधन के बिखरने से परेशान हैं।
अंदर की खबर: टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “अभिषेक बनर्जी इस ट्वीट से खुश नहीं हैं। फिर भी, आसनसोल के हिंदी भाषी वोटों को देखते हुए पार्टी शांत है। डर है कि कार्रवाई करने पर वे पूरी तरह बागी हो सकते हैं।”
3. बीजेपी का ‘मिशन 2026’ और ‘SIR’ का गणित
बिहार में 200+ सीटें जीतने के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद हैं। पीएम मोदी ने 14 नवंबर को कहा था “बिहार तो झांकी है, बंगाल अभी बाकी है।” यह बयान अब बीजेपी के लिए एक मंत्र बन गया है। इसी बीच, सुवेंदु अधिकारी ने ‘SIR’ प्रक्रिया का जिक्र किया है। यह 2026 के चुनाव की असली चाबी हो सकती है।
सुवेंदु ने साफ कहा, “बिहार में फर्जी वोटर हटे, तो नतीजे बदल गए। अतः, बंगाल में भी चुनाव आयोग अब सख्ती कर रहा है। जब बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटेंगे, तो टीएमसी 100 सीटों के नीचे आ जाएगी।”
बंगाल में बीजेपी का बढ़ता ग्राफ:
- 2019 लोकसभा: 40.7% (18 सीटें)
- 2021 विधानसभा: 38.1% (77 सीटें)
- 2026 लक्ष्य: अमित शाह ने 50% वोट शेयर का दावा किया है।
विश्लेषण: ममता का ‘डर’ कितना वास्तविक?
ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। लेकिन, इस बार हालात 2021 जैसे बिल्कुल नहीं हैं।
- एंटी-इनकंबेंसी: लगातार 15 साल की सत्ता के कारण जनता में थकान है।
- भ्रष्टाचार के दाग: पार्थ चटर्जी से लेकर महुआ मोइत्रा तक, कई नेताओं पर आरोप लगे हैं। इस वजह से, भ्रष्टाचार अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
- गठबंधन का बिखराव: बिहार में हार ने साबित किया है कि सिर्फ ‘मोदी-विरोध’ से वोट नहीं मिलते।
निष्कर्ष: कुल मिलाकर, नवंबर 2025 का महीना बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम है। अगर महुआ जेल जाती हैं और शत्रुघ्न पार्टी छोड़ते हैं, तो टीएमसी कमजोर पड़ जाएगी। फिलहाल, सबकी निगाहें 21 नवंबर की कोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं।
